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Friday, March 4, 2011

सुना होगा बहुत तुमने....

सुना होगा बहुत तुमने......
कहीं आँखों की रिमझिम का......
कहीं पलकों की शबनम का.......!!!

पढ़ा होगा बहुत तुमने..
कहीं लहजे की बारिश का....
.कहीं सागर के आंसूं का.....!!!

मगर तुमने कभी हम दम....
कहीं देखे...?
कहीं पढ़े...?
किसी तहरीर के आंसू........!!!

मुझे तेरी जुदाई ने.....
यही दौलत तो बख्शी है.....!!!

कि मैं जो लफ्ज लिखता हूँ....
वो सारे लफ्ज रोते हैं......

मैं जो सपने बुनता हूँ....
सारे बेचैन करते हैं..........!!!
मेरे संग इस जुदाई में
मेरे अल्फाज मरते हैं.....!!!

सभी तारीफ़ करतें हैं....
मेरी तहरीर की... लेकिन.....
कभी कोई ...नहीं सुनता
मेरे अल्फाज की सिसकी....!!!

फलक भी जो हिला डाले....
मेरे लफ्जों में हैं शामिल.....
उसी तहरीर के आंसू.......!!!


मेरे आने से पहले तुम..
कभी यूँ ही चले आओ....
कभी देखो मेरे हमदम.....
मेरी तहरीर के आंसू.....!!!

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