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Sunday, March 6, 2011

मोहब्बत और कहानी

तुम्हे कैसे बताये हम...?
मोहब्बत और कहानी में
कोई रिश्ता नहीं होता...!!!
कहानी में,
तो हम वापिस भी आते हैं
मोहब्बत में पलटने का कोई रास्ता नहीं होता ....!!!
जरा सोचो
कभी दिल में खराशें डालती यादो की सफ्फक्की
कभी दामन से लिपटी है
किसी भूल हुई सौगात की नम नाकी
मुझे देखो
मेरे चेहरे पे कितने मौसम की गर्द है
और इस गर्द की तह में
समय की धूप में समय की  में रखा हुआ एक आइना
और आईने में ता हद इ नजर तक फ़ैली
मोहब्बत के सितारे अक्स बन के झिलमिलाते है
नई दुनियाओं का रास्ता बताते हैं
लकीरों में कहानी है
कहानी और मोहब्बत में अजब  सी जंग जारी है
मोहब्बत में एक ऐसा मोड़ आता है
जहाँ आकर कहानी हार जाती है
कहानी में तो कुछ किरदार हम खुद  फर्ज़ करते हैं
मोहब्बत में कोई किरदार भी फर्जी नहीं होता
कहानी को कई किरदार
मिल जुल के आगे चलाते हैं


मोहब्बत अपने किरदारों को खुद आगे बढाती है
कहानी में कई किरदार जिन्दा ही नहीं रहते
मोहब्बत अपने किरदारों को मरने ही नहीं देती
कहानी के सफ़र में
मंजरों की धूल उड़ती है
मोहब्बत की मुसाफत राहगीरों को बिखरने नहीं देती
मोहब्बत एक शजर है
और शजर को इससे क्या मतलब
की इसके साए में जो थका हरा मुसाफिर आके बैठा है
अब इसकी नस्ल क्या है ,,,रंग कैसा है ...?
कहा से आया है और किस सिम्त जाना है ?
शजर का काम तो बस छांव देना
धूप सहना है
इसे इस से गरज क्या है ?
पड़ाव डालने वालों में किसने
छांव की तकसीम का झगडा उठाया है ?
कहा किस अहद को तोडा ?
कहा वादा निभाया है...?
मगर हम जानते हैं
छांव जब तकसीम हो जाये
तो अक्सर धूप के नैजे
रग ओ पय में उतरते हैं 
और इस के ज़ख्म खुर्दा लोग
जीते हैं ना मरते हैं......!

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