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Tuesday, April 19, 2011

तन्हा तन्हा सी रात

तन्हा
तन्हा सी रात 
और
तन्हा तन्हा से हम....

अफसुर्दा
अफसुर्दा यादे
भीगे
भीगे से मौसम.....!!!

सूखे
पत्तों का शोर...
अँधेरे की
सरगोशी.... 

धड़कन की आहट
किस्मत से
अपने शिकवे ......!!!

तेरे
अहसास का
अटूट बंधन .......!!!!

तेरी
चाहत  के पल
तेरे
आने की उम्मीदें ......!!!

तेरे
रास्ते पे नजर
लम्हा लम्हा
रात का ढलना...!!!

पल पल
अपनी ..
आस का टूटना
दिल के
जख्मो का गहरा होना....!!!

और फिर
"तन्हा तन्हा सी रात
तन्हा तन्हा से हम..."

1 comment:

  1. in tanhayio me kahi kho na jaye
    darte hai kahi tujhe yuhi hi kho na jaye


    gajab likha hai anand ji love it

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