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Sunday, May 15, 2011

हर शख्श मोहब्बत करता है.....!!!




अल्फाज के
झूठे बंधन में
गरज के 
गहरे पर्दों में ....
हर शख्श मोहब्बत करता है.....!!!


हालाँकि
मोहब्बत कुछ भी नहीं
सब  
झूठे रिश्ते-नाते है
सब
दिल रखने की बातें हैं ....!!!


कब ,
कौन किसी का होता है....?

सब
असली रूप छुपाते हैं ...
अहसास से
खाली लोग यहाँ
लफ्जों के
तीर चलाते हैं .........!!!
एक बार नजर में आकर वो
फिर सारी उम्र रुलाते  है.....!!!

ये
इश्क- मोहब्बत ,मेहर-ओ-वफ़ा
सब
रस्मी -रस्मी बातें हैं .....!!!


हर शख्श
खुद ही की मस्ती में............

"बस अपनी खातिर जीता है".........!!!!!!











 

5 comments:

  1. हर शख्स खुद ही मस्ती में
    अपनी खातिर जीता है "
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति बधाई |
    आशा

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  2. बहुत बढ़िया सर.

    ----------------------
    आपकी पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

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  3. सत्य को कहती अच्छी रचना

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  4. सच्चाई बयाँ कर दी………लिखने का अन्दाज़ बहुत पसन्द आया।

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  5. aapki rachana pasand aayi...badhiya

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