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Sunday, June 19, 2011



सुनो.....
किस्मत से लड़ने की 
कभी ,
कोशिश  नहीं करते.....!!!   


मुकद्दर 
जो मुखालिफ हो....
दुआए... बे-असर जाएँ....
सभी मंजर 
बिखर जाएँ.....

तो ,
ऐसे में बगावत की  
कभी 
कोशिश नहीं करते.......!!!








किसी के                                
साथ चलने की                    
किसी के 
दिल में बसने की 
कभी ,
ख्वाहिश नहीं करते  ...!!!

किसी,
एक शख्श की खातिर 
सभी से दूर हो जाना..........
कहाँ  की.... ये मोहब्बत है...?

मोहब्बत 
ये  नहीं होती.........



"मोहब्बत ....दिल में होती है.....!!!



2 comments:

  1. is poem ka meaning samjh nahi aya ...khawahish par to duniya kayam hai...

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  2. आप १०० प्रतिशत सही है जी....हमारी एक लाइन भी सही है...."मोहब्बत दिल में होती है"शुक्रिया...!!

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