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Saturday, February 9, 2013

वो सपने बेहिसाब थे .....!!!

ना गिला है कोई
हालात से ..
ना शिकायते
तेरे जज्बात से ....

खुद ही
सारे वर्क जुदा हुए ...
मेरी
जिंदगी की किताब से ....

तुझे चाहा था ...
तुझे पा लिया ....
तुझे पा के भी
तुझे खो  दिया ....

मुझे
ख्वाहिशों की थी
आरज़ू ,....
मेरी जिन्दगी में
अजाब थे ...
मेरी वहशतों की राह में ..
फकत महफ़िलों की शराब थी .....
कटी उम्र
जिसकी तलाश में ...
मेरी रतजगों के
वही ख्वाब थे ...

यूँही भटक भटक के
तमाम उम्र
कभी असर ही न हुआ ....
.जिन्हें खो दिया ...
तेरे इश्क में ....
वो सपने
बेहिसाब थे .....!!!

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