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Wednesday, July 26, 2017

हमे बचना होगा


आफिस आते हुये
रास्ते मे
कांग्रेस मिली
माथा पीट रही थी ....!!
मुंह मे बिहार मेक गुटका था
हाथ फटी हुयी जेब मे
न कुछ बोल पायी
न हाथ ही हिला पायी ...!

हम भारतीय
बुजुर्गों पर थोड़ा ध्यान दें ,
विकास की आपा धापी मे
हमने रिश्वतखोर चाचाओं की जगह
पगड़ी वाले किसान को
रिक्शे वाले ताऊ को
सब्जी वाली बुआ को
मीठी वाणी वाले आडवाणी को
सड़क पर खड़ा कर दिया है ...!!

हमे बचना होगा
इशरत बानो के
मुहबोले अब्बूओं से
सैंडील पहन कर
बेवकूफ बनाते
संसद पहुंचते डब्बुओं से ...
मंच पर कविता पढ़ते हुये
दो मुंहे साँपों से ...
पूर्वोत्तर की तरफ फैलते हुये
ममतामयी पापों से ....!!

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