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Friday, September 16, 2011

हमारा बस अगर होता ....!!!

सुनो.....

हमारा 
बस अगर होता 
तुम्हे 
सब से चुरा लेते 
तुम्हे 
दिल में छुपा लेते
 तुम्हे 
आँखों में रख लेते .....
कभी न रूठने दते
कभी न टूटने देते.....!!!

तुम्हे 
हम कैद कर लेते 
बस अपने दिल की दुनिया में...
किसी भी हाल में हम फिर 
तुम्हे 
आजाद ना करते 
सभी दुनिया 
भुला दते
तुम्हे 

अपना बना लेते .....!!!

हमारे 
बस में होता तो ......
मगर है बेबसी ऐसी 
हमारा  
दिल मचलता है  
तुम्हे ही 
याद करते हैं....
तुम्हारा  
कुर्ब चाहते  हैं 

मगर 
हम क्या करे जाना ...???

"हमारा बस  नहीं चलता ....!!! "



4 comments:

  1. ओह यह कैसी बेबसी है ..सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. बेबसी का सुन्दर चित्रण किया है।

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  3. dhadkane is dil ki us dil ko bhi dhadkayeingi..jo aag idhar lagi hai udhar bhi lag jayegi..yaad tum aaj karte ho use bhi yaad aayegi..jara jhumne do sawan umadne do badal..jhuki palkein sab kah jayengi..bash chale na chale ishq ki bas chal jayegi
    shandar.deewangi.

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  4. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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