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Monday, June 27, 2011

राती सुप्न्यों माँ आँदी तू...!!



क्यों जागते हो....
क्या सोचते हो....?                               
कुछ  हमसे कहो 
तन्हा न रहो....!!!

यादो के 
बरसते बादल को 
पलकों पे
सजाना ठीक नहीं.....!!!


 जो 
अपने बस की बात न हो
उस को 
दोहराना ठीक नहीं....!!!

अब रात की 
आँखे भीग चली.....
और चाँद भी 
है छुप जाने को.....


कुछ देर में...
शबनम आएगी....
फूलों की 
प्यास बुझाने को ....!!!

 ख्वाबों के 
नगर में खो जाओ...


"अब सो जाओ....!! अब सो जाओ....!!!


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