Sunday, August 19, 2012

बारिशों के मौसम में.....


बारिशों के मौसम में.....
जब किसी की याद आये,
तुम जरा सा रो लेना
अपने रोते चेहरे को ......
बारिशों में  धो लेना....!!!

बारिशों  का मौसम भी ,
जब बुरा लगे तुमको....
और अपनी शामें भी
तुम को तन्हा लगती हों
या तो चांदनी राते ..
तुम से कुछ न कहती हों....
उस घडी समझ लेना .....
तुमने एक खता की थी....!!!

बारिशों के मौसम में ,
तुमने जिस को छोड़ा था
वो ही तुमको प्यारा था ....
तुम ने जिस को ठुकराया
उसमे दिल तुम्हारा था ....
अब सजा तो मिलनी थी......!!!

 
बारिशों के मौसम में ,
उसकी सिसकियाँ तुमको
रात भर सताती है....
उसकी सर्द आहें भी ..
दर्द-ऐ-दिल जगाती है ....
तुम उदास रहते हो ....!!!

बारिशों के मौसम में....
जब किसी की याद आये...
उस घडी  समझ लेना .....
आज तुम जो तन्हा हो....
तुम से दूर रह कर भी
आज वो भी तन्हा है....
बारिशों के मौसम में......!!!

1 comment:

  1. दर्दभरी रचना...
    तस्वीर भी बहुत खूब लगायी है..

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