एक जरा सी रंजिश से ..... शक की ज़र्द टहनी पर ..... फूल बदगुमानी के .... इस
तरह से खिलते हैं .... जिंदगी से प्यारे भी .... अजनबी से लगते हैं .....!!!
गैर बनके मिलते हैं .... दोस्तदार लहजों में .... सलवटें सी पड़ती हैं
.....!!! उम्र भर की चाहत का .... आसरा नहीं मिलता ... दहशत -ऐ - बे यकीनी
में रास्ता नहीं मिलता .....!!!! फूल रंग वादों की मंजिले सिकुड़ती हैं
....!!! राह मुड़ने लगती है .... बेरुखी के गारे से .... बे दिली की मिटटी से
..... फासलों की ईंटों से ... ईंट जुड़ने लगती है ....!!! खाक उड़ने लगती है
... वहमों के सर्द साए से ..... उमर भर की मेहनत को ... पल में तोड़ जाते हैं
...!!! . भीड़ में ज़माने की .. साथ छोड़ जाते हैं .... एक जरा सी रंजिश से .... साथ
छोड़ जाते हैं ...!!! ख्वाब टूट जाते हैं ......!!!
खुद ही सारे वर्क जुदा हुए ... मेरी जिंदगी की किताब से ....
तुझे चाहा था ... तुझे पा लिया .... तुझे पा के भी तुझे खो दिया ....
मुझे
ख्वाहिशों की थी आरज़ू ,.... मेरी जिन्दगी में अजाब थे ... मेरी वहशतों की
राह में .. फकत महफ़िलों की शराब थी ..... कटी उम्र जिसकी तलाश में ... मेरी
रतजगों के वही ख्वाब थे ...
यूँही भटक भटक के तमाम उम्र कभी असर ही न हुआ
.... .जिन्हें खो दिया ... तेरे इश्क में .... वो सपने बेहिसाब थे .....!!!
जब पंछी सारे उड़ जाएँ
हर सिम्त
अँधेरा छा जाए
जब गुजरी बातें
याद आयें
और बीती बातें
तडपाये
मत तन्हा तन्हा
घबराना ....
तुम पास हमारे
आ जाना ...
जब कोई दिन में
शाम करे ....
या
लब की हँसी
बदनाम करे .... जब दर्द
सुकून का
नाम ना ले ......
या रातों की
नींद
हराम करे .......!!!मत तन्हा तन्हा
घबराना ....
तुम पास हमारे
आ जाना ... दिल प्रीत हमारी
दुहराए .......
या रीत पुरानी
याद आये ..... जब
मिलने को भी
दिल चाहे .....
और प्यार
भरा दिल ना पाए ....मत तन्हा तन्हा
घबराना ....
तुम पास हमारे
आ जाना .......!!!!