Thursday, February 23, 2012

आज ऐसा करते हैं ....!!!


सुनो जाना....!!!
आज ऐसा करते हैं ....!!!

बा-सादा लफ़्ज़ों में
वजह -- जिंदगी   कह के 
वसल  की जरुरत पर
फिर से जोर देते हैं ....

आज ऐसा करते हैं
ज़िक्र वही करते हैं...
नाम और देते हैं....!!!

जब्त के किनारों से
दर्द अपना लिपटा है
टूटते किनारे अब
दर्द और देते हैं...

आज ऐसा करते है....
दर्द से उलझते है
जब्त छोड़ देते हैं....!!!

तार तार दामन को
खार खार  राहों  में
रंजिशें भुला के हम 
आके  जोड़ देते हैं ....

आज ऐसा करते है
खुद नहीं पलटते हैं...
राहें मोड़ देते है.....!!!

सब्ज सब्ज मौसम में
लाल लाल आँखों में
ख्वाब की रगों से हम
खून निचोड़ लेते हैं ..

आज ऐसा करते हैं....
ये भी कर गुजरते हैं
ख्वाब तोड़ देते हैं....!!!

  कि अब दुआओं को 
मातमी रिदाओं में
फिर से कर के अलविदा
मौका और देते हैं ...

आज ऐसा करते हैं....
दरिया में उतरते हैं...
और सब  ....

"
रब" पे छोड़ देते हैं.....!!!

Saturday, January 14, 2012

मुझे बेहद मोहब्बत है ....!!!


मुझे 
बेहद  मोहब्बत है 
तेरे कदमो की आहट से 
तेरी इस 
मुस्कराहट से...
तेरी बातों की खुशबू से 
तेरी आँखों के जादू से....!!!


तेरी दिलकश 
अदाओं से...
तेरी कातिल 
जफ़ाओं से....!!!

मुझे बेहद मोहब्बत है.....!!!


तेरी राहों में 

रुकने से....
तेरी पलकों के 
झुकने से....
तेरे होंठो के 
हिलने से...
सहर -ओ -शाम हाथों पे
तेरा ही नाम लिखने से....!!!

तेरे गुस्से -अदावत से...
तेरी बे-वजह 
शिकायत से...
कहा तक कहूं 
सनम मेरे .....
तेरी हर एक आदत से

मुझे बेहद ..मोहब्बत है....!!!


Sunday, January 8, 2012

हवाएं सर्द जनवरी की
टूटे  दिल के दर पे फिर...

दस्तक देने आयी हैं...!!!

फिर से खुश्क  हवाओं में 
भटकती हुई सदायें है....!!!

सुलझे नहीं हालत अभी....

वोही  आस  में लिपटी हुई 
दुआएं हैं...!!!
ऐ जिंदगी  
जरा गिनवा मुझको ...
कितनी मेरी खताएं हैं....???

जनुवरी के दरवाजे 

मुझे बता... 
इस बरस की कैसी 

सजाएं है....???

Sunday, December 11, 2011

शाख की "गुलाब"

सुनो...!!
मेरी दास्तान का
उरोज था...
तेरी
नरम पलकों की छांव में .,..!!!
मेरे साथ था
तुझे जागना...
तेरी आँख कैसे झपक गई....???

तुम मिले भी तो
भला क्या मिले...?
वही दूरियां
वही फासले....!!!

न कभी
हमारे कदम बढे
न कभी तुम्हारी
झिझक गई.....!!!

तेरे हाथ से
मेरे होंठ .....तक
वही इन्तेजार की प्यास है....!!!

मेरे नाम की जो
शराब थी ...
कही रास्ते में छलक गई....!!!
तुझे
भूल जाने की कोशिशे....
कभी
कामयाब न हो सकी..!!!

तेरी याद
शाख की "गुलाब" है...
जब
हवा चली ,
लहराई
और.....

"महक"  गई........!!!

Monday, December 5, 2011

अजब पागल सी लड़की है...!!!(चौथी किस्त)

अजब पागल सी लड़की है
दिसम्बर
जब भी आता है
वो पगली फिर से 
 बीते  मौसम को याद करती है....


पुराने कार्ड पढ़ती है 
कि जिसमे 
उसने लिखा था
मै लौटूंगा  दिसम्बर में....!!!

नए कपडे बनाती है...
वो सारा  घर 
सजाती है ...
दिसम्बर के 
हर एक दिन को 
वो गिन गिन के
बिताती है
जूं ही १५
गुजरती है 
वो कुछ कुछ टूट जाती है
मगर फिर भी
पुरानी एल्बम खोल के
माझी को बुलाती है

नहीं मालूम ये उस को 
कि बीते वक्त की
ख्वाहिशें ...
बहुत तकलीफ देती है ...
मगर वो नादान
महज दिल को जलाती है ....!!!

यूँ ही 
दिन बीत जाते है....
दिसम्बर लौट जाता है...!!!
मगर
वो खुशफहम लड़की 
दुबारा से  कलेंडर में 
दिसम्बर के पन्ने को
नाजुक ऊँगली से मोड़कर

फिर से दिसम्बर के 
ख्याल  में डूब जाती है
कि आखिर उसने  लिखा था ...

"मै लौटूंगा दिसम्बर में....!!!"

अजब पागल सी लड़की है...!!!

Tuesday, November 22, 2011

सुनो नाराज मत होना,...!!!



सुनो.....!!!
सुनो  नाराज मत होना,
गिले चाहे बहुत करना
रुलाना और ..बहुत लड़ना 
मगर नाराज मत होना....!!!
 
कभी ऐसा जो हो जाये
कि..तुम्हारी 
याद में खोकर 
किसी लम्हे में ..मै... जाना ...
जो पागल जैसे 
मै .होकर ....
बिना सूरत तेरी देखे ...
कभी 
शब् में जो .... सो... जाऊं....

तो 
सपनो  में चले आना ......
मुझे अहसास 
दिला देना ......
मगर नाराज मत होना....!!!
कभी ,
ऐसा भी जो हो जाये....
जिन्हें  कहना जरूरी हो 
वो  मुझसे
लफ्ज़ खो  जाएँ...
गुरुर को 
बीच में मत लाना....
मेरी आवाज बन जाना .....!!!

मगर  ..सुनो...!!!

" कभी नाराज मत होना....!!!"

Tuesday, November 15, 2011

कभी तुम भी नजर आओ....!!!


कभी
तुम भी नजर आओ
सुबह से
शाम तक हमको...
हजारो लोग
मिलते है......
निगाहों से
गुजरते है.....!!!

मगर
तुम ही नहीं मिलते...
बहुत बेचैन
फिरते हैं....
बड़े बेताब
रहते है....

दुआ को हाथ उठते है....
दुआ में
ये ही  कहते है...
पलकों के शामियाने पे
तुम्हारी
उम्मीद कहती है...

  लगी है
भीड़ लोगों की
मगर इस  भीड़ में जाना
कभी

"तुम भी नजर आओ..."

Wednesday, November 9, 2011

."मुझे तुम साथ पाओगे."

कभी
जो जिंदगी की
उलझने,
तुमको  ही
उलझा  दें .....!!!

कभी जो
रास्तों के... फासले
काटे  न काटें...!!!
कभी जो...
रात की तन्हाई में...
तुम ,
साए को ढूंढो...!!!
किसी अपने को सोचो...
किसी प्यारे को
ढूंढो....!!!

तो फिर
तुम अपनी उँगलियों के
दरमियान.....
कुछ
महसूस कर लेना.....!!!

अपने हाथ की गिरफ्त में....
तुम
एक हाथ पाओगे ...
मुझे तुम ....
साथ पाओगे....
हाँ....
"हमेशा साथ पाओगे......!!!!"